लेह-लद्दाख में हाल के दिनों में बढ़ते तनाव और हिंसा के बीच भारतीय सेना की सक्रियता भी तेज हो गई है। शनिवार, 27 सितंबर 2025 को भारतीय सेना की उत्तरी कमान के कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने लेह पहुंचकर लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की ताजा सुरक्षा स्थिति और उभरते खतरे को लेकर जानकारी दी। इस अहम बैठक में फायर एंड फ्यूरी कोर (14वीं कोर) के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला भी मौजूद थे।
14वीं कोर भारतीय सेना की वह यूनिट है जो सियाचिन, कारगिल और पूर्वी लद्दाख में चीन सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की निगरानी और सुरक्षा करती है। बीते कुछ समय में सीमा के हालात फिर से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं, ऐसे में सेना के शीर्ष अधिकारियों की यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है।
इस बीच लद्दाख के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हालिया बयानबाज़ी ने माहौल को और अधिक भड़का दिया है। वांगचुक ने खुले मंच से कहा कि अगर केंद्र सरकार उनकी मांगें नहीं मानेगी तो लद्दाखी जनता अगली बार चीन की सेना को रास्ता दिखाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उनकी बातों को नजरअंदाज कर रही है और लद्दाख के लोगों की आवाज दबाई जा रही है। वांगचुक के मुताबिक, अब तक लद्दाख की जनता ने चीनी सेना को सीमा पर रोका था, लेकिन अब वही लोग चीन का साथ देंगे।
उनके इस बयान के बाद देशभर में हलचल मच गई। शनिवार को लद्दाख पुलिस ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया। लद्दाख के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने आरोप लगाया है कि वांगचुक का संपर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एक ऑपरेटिव से था। सूत्रों के अनुसार, कुछ महीने पहले वांगचुक पाकिस्तान भी गया था और वहां कुछ संदिग्ध लोगों से मुलाकात की थी। इसके अलावा, अपने अनशन और भाषणों के दौरान उन्होंने कई बार सरकार विरोधी और भड़काऊ बातें कहीं, जिससे जनता में उग्रता बढ़ी।
इसी का नतीजा था कि बुधवार, 24 सितंबर को लद्दाख में हिंसा भड़क गई। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को गोलियां चलानी पड़ीं, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई दर्जन लोग घायल हुए। इस हिंसा के बाद से ही पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
भारत और चीन के बीच सीमा पर लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि पिछले साल अक्टूबर में दोनों देशों के बीच डिसएंगेजमेंट का करार हुआ था और सैनिक कुछ इलाकों से पीछे हटे थे, फिर भी गलवान घाटी की 2020 की हिंसक झड़प के बाद से रिश्ते अब तक सामान्य नहीं हो पाए हैं।
लेह और आसपास के इलाकों में इंटरनेट पर भी रोक लगा दी गई है, और पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। स्थानीय प्रशासन लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। केंद्र सरकार ने भी स्थिति पर नजर रखने के लिए एक उच्चस्तरीय टीम को तैयार रखा है। आने वाले दिनों में लद्दाख का यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा के केंद्र में रहेगा, इसमें कोई शक नहीं।