आईएएस अर्चना सिंह
राजस्थान कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अर्चना सिंह पर सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। 2008 बैच की अधिकारी को पोस्टिंग का इंतजार (एपीओ) कर दिया गया है। इसका कारण पीएम नरेंद्र मोदी की हालिया सभा में तकनीकी खराबी बताया जा रहा है, जहां एक महत्वपूर्ण वीडियो क्लिप नहीं चल सकी। यह घटना जयपुर में हुई थी, जिससे कार्यक्रम में देरी हुई और सभा प्रभावित हुई।
अर्चना सिंह वर्तमान में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं। 24 सितंबर को जयपुर के दादिया गांव में आयोजित पीएम मोदी की रैली में एक प्रोजेक्टर पर चलने वाला वीडियो फंस गया। यह वीडियो केंद्र सरकार की योजनाओं से जुड़ा था, जो सभा का मुख्य आकर्षण था। तकनीकी टीम ने इसे ठीक करने की कोशिश की, लेकिन 20 मिनट की देरी के बाद ही कार्यक्रम आगे बढ़ा। पीएम मोदी ने इसे हल्के में लिया, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने जिम्मेदारी अर्चना सिंह पर डाल दी, क्योंकि वे विभाग की नोडल अधिकारी थीं।
राजस्थान सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने 25 सितंबर को आदेश जारी कर अर्चना सिंह को तत्काल एपीओ कर दिया। आदेश में कहा गया कि तकनीकी लापरवाही से सरकारी कार्यक्रम बाधित हुआ, जो अस्वीकार्य है। यह कार्रवाई बिना किसी औपचारिक जांच के हुई, जिससे नौकरशाही में हड़कंप मच गया। अर्चना सिंह ने अध्ययन अवकाश से लौटकर हाल ही में यह जिम्मेदारी संभाली थी। इससे पहले वे गृह विभाग में विशेष सचिव रह चुकी हैं।
राजनीतिक हलकों में इसकी आलोचना हो रही है। कांग्रेस नेता ने इसे ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’ बताया, जबकि भाजपा ने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं। पूर्व अधिकारी मेधा पाटकर ने ट्वीट कर कहा, “छोटी गलती पर बड़ी सजा, नौकरशाही का दमन।” विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल आयोजनों में ऐसी खराबियां आम हैं, लेकिन उच्च पद पर तैनात अधिकारियों पर दबाव ज्यादा पड़ता है।
अर्चना सिंह ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। विभाग ने कहा कि नई पोस्टिंग जल्द तय होगी। यह घटना राजस्थान में चुनावी माहौल में और चर्चा का विषय बनी हुई है। पीएम मोदी की सभा में 50 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए थे, और यह भाजपा की एक वर्षगांठ पर थी। सरकार ने आश्वासन दिया कि भविष्य में तकनीकी तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।