सोनम वांगचुक
लद्दाख में पूर्ण राज्य और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन तेज हो गया है। मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षक सोनम वांगचुक को आज राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। 59 साल के वांगचुक को लेह से जोधपुर जेल भेजा जा रहा है। यह गिरफ्तारी 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद हुई, जिसमें चार लोग मारे गए और 90 से ज्यादा घायल हुए।
वांगचुक लद्दाख अपेक्स बॉडी (एलएबी) के मुख्य नेता हैं। उन्होंने 10 सितंबर से 15 दिन तक भूख हड़ताल की थी, जिसमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग थी। भूख हड़ताल खत्म होने के बाद प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के खिलाफ बंद बुलाया गया, जो पुलिस कार्रवाई के दौरान हिंसक हो गया। प्रशासन का कहना है कि वांगचुक ने भीड़ को भड़काया।
गिरफ्तारी से पहले वांगचुक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले थे, लेकिन दोपहर 2:30 बजे पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उनके एनजीओ ‘सेकमोल’ का लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया। लेह में कर्फ्यू है और इंटरनेट बंद है, जिससे माहौल तनावपूर्ण है।
राजनीतिक दलों ने इसकी निंदा की। मेधा पटकर ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। महबूबा मुफ्ती ने कहा, “सच बोलने की सजा मिल रही है।” आप ने दिल्ली में मोमबत्ती मार्च निकाला। कम्युनिस्ट पार्टी ने इसे उत्पीड़न कहा। एलएबी ने हिंसा से इनकार किया और कहा कि कुछ युवा बेकाबू हो गए।
लद्दाख के सांसद हाजी हनीफा ने गिरफ्तारी को गलत बताया। एलएबी 29 सितंबर को दिल्ली में केंद्र से बातचीत करेगा। वांगचुक ने कहा, “इस मकसद के लिए जेल जाना गर्व की बात है।” उनकी पत्नी गीतांजलि ने पुष्टि की कि उन्हें जोधपुर ले जाया जा रहा है।
यह घटना लद्दाख के पर्यावरण और संस्कृति के संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर ला रही है। केंद्र ने 2019 में लद्दाख को यूटी बनाने का वादा किया था, लेकिन मांगें पूरी नहीं हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंदोलन अब और तेज हो सकता है।